
भोपाल। सामाजिक आयोजनों के नाम पर जुटाई जाने वाली चंदा और सहयोग राशि को लेकर मध्य प्रदेश में अब समाज के भीतर सवालों की आवाज तेज होने लगी है। समाजसेवियों और जागरूक नागरिकों ने साफ कर दिया है कि सहयोग से पीछे नहीं हटेंगे, लेकिन सहयोग के नाम पर लिए गए पैसे का हिसाब भी मांगेंगे। इसी मुद्दे को लेकर ‘मेरा पैसा–मेरी जिम्मेदारी’ अभियान के तहत आयोजित ऑनलाइन जूम बैठक में प्रदेश के विभिन्न जिलों से जुड़े 25-30 से अधिक समाजसेवियों एवं जागरूक नागरिकों ने करीब चार घंटे तक गंभीर मंथन किया। बैठक में सबसे बड़ा सवाल यही रहा कि चंदा लिया तो हिसाब कब देंगे? वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक कार्यों और आयोजनों के लिए समाज से सहयोग लेना सामाजिक सहभागिता का हिस्सा है, लेकिन सहयोग राशि मिलने के बाद उसकी पारदर्शिता और जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है। समाज के सामने यह स्पष्ट होना चाहिए कि किस व्यक्ति ने कितनी राशि देने की घोषणा की, वास्तव में कितना सहयोग प्राप्त हुआ, पैसा नकद, बैंक या सामग्री के रूप में कितना मिला और आयोजन में कुल कितना खर्च किया गया। यदि किसी व्यक्ति ने अपनी ओर से कोई खर्च किया है तो उसकी जानकारी भी स्पष्ट होनी चाहिए। आयोजन के बाद यदि राशि बचती है तो वह कहां और किस उद्देश्य से रखी या खर्च की गई, यह भी समाज को बताया जाना चाहिए। साथ ही जिस उद्देश्य से कार्यक्रम आयोजित किया गया था, उसकी वास्तविक स्थिति और आयोजनकर्ता का नाम, पता एवं संपर्क नंबर भी सार्वजनिक होना चाहिए। समाजसेवियों ने कहा कि इन सवालों का जवाब मांगना किसी व्यक्ति का विरोध या किसी संस्था पर आरोप नहीं है, बल्कि समाज के सहयोग से चलने वाले सामाजिक कार्यों में जवाबदेही सुनिश्चित करने का अधिकार है। बैठक में यह मांग जोरदार तरीके से उठी कि कार्यक्रम समाप्त होते ही हिसाब बंद नहीं, बल्कि वहीं से हिसाब शुरू होना चाहिए। आयोजन पूरा होने के बाद आय-व्यय का स्पष्ट विवरण समाज के सामने रखा जाए, ताकि सहयोग देने वाले प्रत्येक व्यक्ति को यह जानकारी रहे कि उसका पैसा किस कार्य में उपयोग हुआ। बैठक में राष्ट्रीय विधि सलाहकार पुरुषोत्तम गुप्ता एडवोकेट ने कहा कि सामाजिक संस्थाओं की सबसे बड़ी पूंजी समाज का विश्वास है और यह विश्वास तभी मजबूत होगा जब सामाजिक आयोजनों में पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने समाजहित में जागरूकता बढ़ाने और सहयोग राशि के उपयोग की जानकारी सार्वजनिक करने की आवश्यकता पर जोर दिया। बैठक में किशोर कुमार लहरपुरे ने कहा कि अब भी संभल जाओ। चंदे का हिसाब खोलो, वरना समाज तुम्हारे किए गए कृत्यों को कहीं न कहीं सबके सामने उजागर करने के लिए मजबूर होगा। संभल जाओ, संभल जाओ, संभल जाओ-समाज के नाम पर चंदा लेकर जवाबदेही से बचने वालों को अब समाज की जागरूकता झकझोरने वाली है। राष्ट्रीय प्रवक्ता किसान केशव साहू ने कहा कि सामाजिक सहयोग के नाम पर पैसा लेने वालों को यह समझना होगा कि समाज अब पहले जैसा नहीं रहा। लोग सवाल पूछेंगे, रिकॉर्ड मांगेंगे और अपने सहयोग के उपयोग की जानकारी भी लेंगे। वरिष्ठ समाज सेवी लक्ष्मण साहू रीवा ने कहा कि समाज को अब भावनाओं में बहकर हर जगह चंदा देने की आदत पर पुनर्विचार करना होगा। हमें जागना होगा, समझना होगा कि चंदा किसको देना है, कब देना है और किस उद्देश्य से देना है। सहयोग देने से पहले जानकारी लेना हमारा अधिकार है और सहयोग देने के बाद हिसाब मांगना भी हमारा अधिकार है। सुनील नारायण लाल साहू, इंदौर ने कहा कि हर सामाजिक कार्यक्रम से पहले बजट तय होना चाहिए और उतनी ही राशि का चंदा लिया जाना चाहिए, ताकि आय-व्यय को लेकर किसी तरह की अविश्वसनीयता, भ्रम या संदेह की स्थिति न बने। इससे समाज का विश्वास मजबूत होगा और सामाजिक आयोजनों में पारदर्शिता बनी रहेगी। संतोष राज, प्रदेश मुख्य सोशल मीडिया प्रभारी, नमो नमो मोर्चा भारत ने चंदे की व्यवस्था को लेकर बेहद तीखे शब्दों में अपनी बात रखी। सहयोग राशि के लेन-देन में पारदर्शिता को लेकर उन्होंने कहा कि पैसा अब उसी व्यक्ति या संस्था को दिया जाएगा, जिसका बैंक खाता मध्य प्रदेश में है। जिसका बैंक खाता मध्य प्रदेश में नहीं है, उसे किसी भी प्रकार का चंदा न देंगे और न देने देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि समाज के पैसों के लेन-देन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। सहयोग देने वालों को यह स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए कि राशि किस खाते में जा रही है, किस उद्देश्य से ली जा रही है और उसका उपयोग कहां किया जाएगा। गणेश राम ने कहा कि कार्यक्रम से पहले यही लोग समाज के सामने विनम्र होकर सहयोग मांगते हैं, लेकिन कार्यक्रम समाप्त होते ही जब समाजसेवी हिसाब पूछते हैं तो कुछ लोग अपना रवैया बदल लेते हैं। जिन लोगों से सहयोग लिया गया, उन्हीं समाजसेवियों के प्रति अपमान और तिरस्कार जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा कि समाज को अब ऐसे रवैये को समझना होगा। जो व्यक्ति समाज के सहयोग से अपना राजनीतिक वर्चस्व, व्यक्तिगत प्रभाव या अपना हित साधने की कोशिश करता है, ऐसे समाजसेवियों को चिन्हित करना और उनसे सावधान रहना जरूरी है। समाज की भोली-भाली भावना का फायदा उठाकर कोई भी व्यक्ति अपना स्वार्थ पूरा करे, अब यह व्यवस्था नहीं चलनी चाहिए। शंभु दयाल ने कहा कि समाज का पैसा समाज के काम में ही लगे और उसका पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध रहे, यही पारदर्शी व्यवस्था की पहली शर्त है। संगठन हो या कोई व्यक्ति, सामाजिक सहयोग एकत्र करने से पहले उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए और बाद में प्राप्त सहयोग तथा खर्च का विवरण भी सामने आना चाहिए। बैठक में संगठनों के स्थानीय बैंक खातों, प्राप्त सहयोग, नकद एवं सामग्री के रूप में मिले योगदान तथा खर्च के व्यवस्थित रिकॉर्ड को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ। नारायण साहू रायसेन ने कहा कि समाज अब पहले की तरह आंख बंद करके सहयोग करने वाला नहीं रहेगा। सहयोग देने से पहले लोग यह जानना चाहेंगे कि पैसा किस उद्देश्य के लिए लिया जा रहा है, आयोजन कौन कर रहा है और अनुमानित खर्च कितना है। इसी तरह कार्यक्रम समाप्त होने के बाद आय-व्यय का विवरण मांगना भी सामान्य सामाजिक प्रक्रिया का हिस्सा बनना चाहिए। विनोद साहू कटनी ने स्पष्ट किया कि अभियान का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना या किसी संस्था को बदनाम करना नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जिसमें चंदे और सहयोग राशि को लेकर किसी प्रकार का भ्रम, संदेह या सवाल ही खड़ा न हो। जूम बैठक में राष्ट्रीय समन्वयक किशोर कुमार लहरपुरे, राष्ट्रीय विधि सलाहकार पुरुषोत्तम गुप्ता एडवोकेट, राष्ट्रीय प्रवक्ता किसान केशव साहू नर्मदापुरम, जूम बैठक का संचालन प्रदेश प्रवक्ता शंभू दयाल साहू नमो नमो मोर्चा, सुनील नारायण साहू इंदौर आईटी सेल प्रदेश अध्यक्ष नमो नमो मोर्चा भारत, विनोद साहू कटनी, लक्ष्मण साहू रीवा, अरुण साहू रीवा, नारायण साहू रायसेन, भोपाल जिला अध्यक्ष गणेशाराम लोकेश साहू, आशीष साहू , एडवोकेट उमेश गोलहनी लखनादौन एवं संतोष राज प्रदेश मुख्य सोशल मीडिया प्रभारी, रामआश्रय साहू, परमानन्द साहू, आशीष साहू, अबधशरण साहू, भेरु लाल साहू, सोंमचंद साहू सहित विभिन्न जिलों के समाजसेवियों ने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुनील नारायण साहू ने की तथा मार्गदर्शन किशोर कुमार लहरपुरे ने एवं आभार लोकेश साहू ने प्रदान किया। अभियान का संदेश भी स्पष्ट है-चंदा देना हमारा सहयोग है, हिसाब मांगना हमारा अधिकार है। सभी समाजसेवियों का कहना था कि अब समाज केवल सहयोग करने वाला समाज नहीं रहेगा, बल्कि अपने सहयोग का हिसाब जानने वाला जागरूक समाज बनेगा। न किसी व्यक्ति को निशाना बनाना है, न किसी संस्था को बदनाम करना है-बस ऐसी व्यवस्था बनानी है, जहां समाज का पैसा हो तो उसका हिसाब भी समाज के सामने हो। संभल जाइए… समाज जाग रहा है। सहयोग होगा, लेकिन पारदर्शिता के साथ। विश्वास होगा, लेकिन जवाबदेही के साथ।
