
भोपाल: जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग (क्रमांक-1), भोपाल ने एक महत्वपूर्ण फैसले में टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी को मृतक बीमित के परिवार को 24.68 लाख रुपये से अधिक का क्लेम भुगतान करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही आयोग ने एक्सिस बैंक को भी लोन चुकता होने के बाद एनओसी (NOC) जारी करने के निर्देश दिए हैं। अधिवक्ता उमेश साहू ने पत्रकार संतोष राज को जानकारी देते हुए बताया कि उपभोक्ता आयोग का यह निर्णय उन परिवारों के लिए एक बड़ी राहत है, जिन्हें बीमा कंपनियां तकनीकी और अनुचित आधारों पर क्लेम देने से मना कर परेशान करती हैं। परिवादी श्रीमती कीर्ति शिवहरे के पति स्वर्गीय दीपक शिवहरे ने अपने जीवनकाल में टाटा एआईजी से एक बीमा पॉलिसी ली थी। 9 नवंबर 2020 को कार्डियक अटैक के कारण उनका निधन हो गया था। जब उनके परिवार ने बीमा दावा पेश किया, तो बीमा कंपनी ने यह आरोप लगाते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि दीपक शिवहरे को पहले से स्ट्रोक (पैरालिसिस) की बीमारी थी और उन्होंने पॉलिसी लेते समय इसे छिपाया था। बीमा कंपनी द्वारा क्लेम रिजेक्ट किए जाने के बाद, श्रीमती कीर्ति शिवहरे और उनके दो बच्चों की ओर से अधिवक्ता उमेश साहू ने जिला उपभोक्ता आयोग में मामला प्रस्तुत किया था। प्रकरण में सुनवाई करते हुए आयोग के अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल और सदस्या डॉ. श्रीमती प्रतिभा पाण्डेय की पीठ ने पाया कि बीमा कंपनी ने बीमारी छिपाने का कोई ठोस लिखित दस्तावेज (बीमा प्रस्ताव पत्र) पेश नहीं किया। आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए पीड़ित परिवार के पक्ष में फैसला सुनाया। आयोग ने मुख्य तौर पर आदेश जारी किए कहा कि, टाटा एआईजी कंपनी को निर्देश: पीड़ित परिवार को 24,68,383 रुपये की क्लेम राशि, दावा निरस्त होने की तिथि से भुगतान की तिथि तक 9% वार्षिक ब्याज के साथ 2 महीने के भीतर अदा करें। मानसिक क्षतिपूर्ति और वाद व्यय मे बीमा कंपनी को मानसिक कष्ट के लिए 5,000 रुपये और मुकदमा खर्च के लिए 3,000 रुपये अलग से देने होंगे। एक्सिस बैंक को निर्देश पर दीपक शिवहरे द्वारा लिए गए लोन की पूरी राशि बीमा के माध्यम से चुकता हो चुकी है, इसलिए बैंक को 2 महीने के अंदर कीर्ति शिवहरे को एनओसी (No Objection Certificate) जारी करनी होगी।